
दुनिया के भू-राजनीतिक मंच पर भारत ने एक ऐसी चाल चली है जिसने वैश्विक व्यापार के समीकरण बदल दिए हैं। लगभग दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद, भारत और 27 देशों के समूह यूरोपीय संघ (EU) ने ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लगा दी है। यह समझौता सिर्फ व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि यह उन ताकतों को भारत का ‘करारा जवाब’ है जो व्यापारिक प्रतिबंधों और ऊंचे टैरिफ के जरिए भारत की रफ्तार रोकना चाहते थे। 2 अरब की आबादी और करीब $24 ट्रिलियन के संयुक्त बाजार वाला यह समझौता भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होने वाला है।
इंडिया-यूरोप FTA को ‘मदर ऑफ ऑल डील’ क्यों कहा जा रहा है?
इस समझौते को विशेषज्ञों द्वारा ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ की संज्ञा दी जा रही है क्योंकि यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक ब्लॉक को एक साथ लाता है। यह समझौता इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसके तहत भारत के 90% से अधिक उत्पादों पर लगने वाली आयात ड्यूटी को समाप्त कर दिया गया है, जिससे भारतीय सामान यूरोपीय बाजारों में काफी सस्ते और प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। रणनीतिक रूप से यह तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब अमेरिका ने भारत पर 50% जैसे ऊंचे टैरिफ थोपे हुए हैं। अमेरिका द्वारा व्यापारिक वार्ताओं को अंतिम समय में रोकना और भारत पर रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में निराधार आरोप लगाना, भारत को नए और विश्वसनीय साथियों की तलाश की ओर ले गया। ऐसे में यूरोप के साथ यह हाथ मिलाना भारत की एक स्वतंत्र और मजबूत विदेश नीति का परिचायक है जो किसी एक महाशक्ति के दबाव में काम नहीं करती।
आयात और निर्यात: क्या खरीदेगा और क्या बेचेगा भारत?
इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे।
- भारत क्या बेचेगा (Export): भारत मुख्य रूप से टेक्सटाइल (कपड़े), इंजीनियरिंग सामान, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर प्रोडक्ट्स, जूते, समुद्री भोजन (Seafood) और आईटी सेवाएं यूरोप को भेजेगा।
- भारत क्या खरीदेगा (Import): यूरोप से भारत में मशीनरी, ट्रांसपोर्ट उपकरण, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन (Chemicals), वाइन और डेयरी उत्पादों की उन्नत तकनीक आने की उम्मीद है।
किस सेक्टर की चमकेगी किस्मत?
- इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग: भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात को $25 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है।
- आईटी और सर्विसेज: भारतीय पेशेवरों के लिए यूरोप में काम करना और सेवाएं देना अब बहुत आसान हो जाएगा, जिससे सर्विस सेक्टर में भारी उछाल आएगा।
- टेक्सटाइल और लेदर: भारतीय कपड़ों और जूतों पर जो ड्यूटी लगती थी, उसके हटने से बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले भारत को बढ़त मिलेगी।
आम लोगों के लिए यह ट्रेड डील कितनी लाभकारी है?
एक आम नागरिक के नजरिए से देखें तो यह डील रोजगार के नए अवसर लेकर आएगी। विशेषकर कपड़ा, हस्तशिल्प और कृषि जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में लाखों नई नौकरियां सृजित होंगी। तकनीक सस्ती होने से इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी उत्पादों के दाम कम हो सकते हैं, जिसका सीधा असर जनता की जेब पर पड़ेगा। इसके अलावा, भारतीय किसानों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है क्योंकि उनके उत्पादों जैसे चाय, कॉफी, मसाले और ताजी सब्जियों को अब एक बड़ा और प्रीमियम बाजार मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और आम आदमी की क्रय शक्ति में वृद्धि होगी।
पश्चिम में बदलता भू-राजनीतिक समीकरण
यह समझौता भारत को केवल रूस या अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय यूरोप के रूप में एक मजबूत तीसरा स्तंभ देता है। अमेरिका द्वारा ‘रूस-यूक्रेन युद्ध की फंडिंग’ जैसे निराधार आरोप लगाकर भारत के साथ ट्रेड डील को होल्ड करना उसकी दोहरी नीति को दर्शाता है। यूरोप के साथ यह समझौता साबित करता है कि भारत अब किसी एक शक्ति के दबाव में नहीं झुकेगा और अपनी आर्थिक नियति खुद तय करेगा।
भारत की व्यापारिक शक्ति:-
| क्षेत्र/देश | जनसंख्या (लगभग) | बाजार मूल्य (GDP) | मुख्य लाभ |
| भारत | 1.45 अरब | $4 ट्रिलियन | भारी निर्यात अवसर और रोजगार |
| यूरोपीय संघ (EU) | 45 करोड़ | $20 ट्रिलियन | उच्च तकनीक और निवेश का स्रोत |
| संयुक्त (Combined) | ~2 अरब | ~$24 ट्रिलियन | दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड ब्लॉक |
भारत की FTA यात्रा: अब तक का सफर
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी व्यापारिक कूटनीति को तेज किया है। भारत अब तक 18 से अधिक देशों के साथ समझौते कर चुका है, जिनमें हालिया महत्वपूर्ण समझौते शामिल हैं:
- UAE (CEPA) – 2022
- ऑस्ट्रेलिया (ECTA) – 2022
- EFTA (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे आदि) – 2025
- यूनाइटेड किंगडम (UK) – 2025 (हस्ताक्षरित)
- ओमान और मॉरीशस – 2021-2025