
बिहार की मिट्टी में पली-बढ़ी प्रतिभाओं ने हमेशा राष्ट्रीय फलक पर अपनी छाप छोड़ी है। ऐसी ही एक कहानी है पत्रकार शैलेंद्र कुमार की, जो मुजफ्फरपुर के छोटे से शहर से निकलकर आज दिल्ली के मीडिया जगत में एक प्रमुख न्यूज़ चैनल में एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। शैलेंद्र कुमार का सफर दिखाता है कि सफलता के लिए मेहनत का कोई विकल्प नहीं है, लेकिन उस मेहनत को सही दिशा देना ही असली मंत्र है।
संघर्ष की पाठशाला: मुजफ्फरपुर से ‘सर्व’ का साथ
शैलेंद्र कुमार की शुरुआती शिक्षा मुजफ्फरपुर में हुई। उन्होंने 1993 में नथुनी भगत हाइस्कूल से मैट्रिक और फिर एलएस कॉलेज से भौतिकी शास्त्र (Physics) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उनका करियर मोड़ तब आया जब वे बैंकिंग की तैयारी के लिए एलएनटी कॉलेज में चलने वाली एक अनूठी संस्था ‘सर्व’ से जुड़े।
शैलेंद्र कुमार के लिए ‘सर्व’ केवल कोचिंग सेंटर नहीं था, बल्कि एक “धुंध में आशा की किरण” था। उन्होंने याद करते हुए बताया कि यहाँ का कॉन्सेप्ट अद्भुत था:
“सर्व एक ऐसी संस्था थी, जहाँ शिक्षक ही छात्र थे और छात्र ही शिक्षक थे। यहाँ ग्रुप डिस्कशन से विषयों की समझ अच्छी हुई और मेरी अंग्रेजी भी ठीक हुई। इसने आगे बढ़ने में बहुत सहयोग किया।”
जब बैंकिंग बोर्ड की योजना समाप्त हुई, तो शैलेंद्र कुमार ने दिल्ली का रुख किया और आईआइएमसी (IIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा किया। यह उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और सीखने की ललक को दर्शाता है।
मेहनत का विकल्प नहीं, लेकिन ‘सिलेबस’ क्यों है बॉस?
आज, एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत शैलेंद्र कुमार युवाओं को सफलता के लिए सबसे जरूरी सलाह देते हैं: लक्ष्य तय करो और सिलेबस के अनुसार पढ़ो।
वह दृढ़ता से मानते हैं कि:
“मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। कोई शॉर्ट कट नहीं होता। कोई ऐसा उदाहरण नहीं है, जिसमें मेहनत किया जाये और सफलता नहीं मिले।”
लेकिन मेहनत के साथ ही समय प्रबंधन और रणनीति महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों को दो प्रमुख बातों पर ध्यान देने को कहा है:
- लक्ष्य निर्धारण: सबसे पहले अपना एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें।
- सिलेबस पर फोकस: आजकल इंटरनेट पर सूचनाओं का अंबार है। छात्र को यह समझना होगा कि क्या लेना है और क्या छोड़ना है। अपनी ऊर्जा को अनावश्यक जानकारी पर बर्बाद करने के बजाय, सिलेबस के अनुसार तैयारी करनी चाहिए।
बिहार विश्वविद्यालय से पढ़कर भी शैलेंद्र कुमार ने साबित किया है कि अगर तैयारी केंद्रित और समर्पित हो, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। वह मानते हैं, “मन से तैयारी करें, सफलता जरूर मिलेगी।”