‘हम संत-साधु नहीं हैं’,  वायरल वीडियो पर एंकर अभिनव पांडेय ने दी सफाई

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो जंगल में आग की तरह फैल रहा है, जिसके केंद्र में न्यूज़ एंकर अभिनव पांडेय हैं। ‘न्यूज़ पिंच’ के एक शो के दौरान हुई उनकी निजी बातचीत अनजाने में ऑन-एयर लीक हो गई है, जिसने मीडिया इंडस्ट्री और ‘गोदी मीडिया’ के आलोचकों को एक नया मुद्दा दे दिया है।

वीडियो की सामग्री बेहद कंटेंटदार है, जिसे देखते ही लोग इसे शेयर कर रहे हैं और तथाकथित गोदी मीडिया के जख्म पर नमक रगड़ते दिखाई दे रहे हैं।

वायरल वीडियो में क्या है?

वायरल हो रहे वीडियो में अभिनव पांडेय अपने सहकर्मियों के साथ अनौपचारिक बातचीत करते हुए दिख रहे हैं। वीडियो में उन्होंने कई महत्वपूर्ण बातें स्वीकार की हैं:

  1. गलती स्वीकार: अभिनव पांडेय ने स्वीकार किया कि वीडियो में उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द “गलत” थे और सार्वजनिक जीवन में ऐसे शब्द इस्तेमाल नहीं किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पर्सनल बातचीत का हिस्सा था, जो गलती से लाइव हो गया।
  2. माफी और सम्मान: उन्होंने वीडियो में अंजना ओम कश्यप और चित्रा त्रिपाठी जैसी एंकरों का नाम लिया था, जिस पर उन्होंने माफी मांगी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उनसे कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं है और वह चित्रा त्रिपाठी के काम का व्यक्तिगत तौर पर सम्मान करते हैं, खासकर गोरखपुर जैसे शहर से आकर इतना बड़ा मुकाम हासिल करने के लिए।
  3. टीआरपी पत्रकारिता पर निशाना: उन्होंने स्वीकार किया कि वह एक ‘व्यवस्था’ पर बात कर रहे थे जो आजकल की टीवी पत्रकारिता में चल रही है। उनका इशारा ‘हिंदू-मुस्लिम की जबरदस्ती की बहस’ और प्रवक्ताओं को लड़ाने (मुर्गा लड़ाने वाली बात) की तरफ था।

अभिनव का स्पष्टीकरण: ‘हम संत-साधु नहीं हैं’

माफी मांगने के बावजूद, अभिनव पांडेय ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि “30-31 साल के लड़के हैं और कोई संत-साधु नहीं हैं। यह बात सही है कि गाली या ये सब चीजें हम लोग आपस में बात करते हैं तो मुंह से निकलती हैं।” उन्होंने भविष्य में सजग रहने की बात कही।

अंत में, उन्होंने अपनी पत्रकारिता की दिशा स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारा काम है जनता के लिए सवाल करना, जनता की आवाज़ बनना। हम सरकार से सवाल पूछेंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम विपक्ष की गोदी में बैठ जाएंगे। हमारा काम है जनता की तरफ रहना।

इस वायरल वीडियो ने एक बार फिर टीआरपी के दबाव में काम करने वाले न्यूज़ रूम की पर्दे के पीछे की सच्चाई और पत्रकारों की निजी राय को खुलकर सामने ला दिया है।


क्या आप मानते हैं कि पत्रकारों की निजी राय उनके पेशेवर नैतिकता को प्रभावित करती है? कमेंट में अपनी राय दें।

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