
रिया चक्रवर्ती से जुड़े केस के दौरान जब देश का पूरा न्यूज़ इकोसिस्टम ‘मीडिया ट्रायल’ और सनसनीखेज रिपोर्टिंग में डूबा हुआ था, तब एक पत्रकार ने अपनी पेशेवर नैतिकता और साहस का परिचय दिया। वह पत्रकार हैं प्रीति चौधरी, जिन्होंने न केवल रिया चक्रवर्ती से माफी मांगने की हिम्मत दिखाई, बल्कि यह भी स्वीकार किया कि मीडिया ने उस समय अपनी सीमाएं लांघी थीं।
आज भी मीडिया जगत में प्रीति चौधरी के इस कदम की सराहना की जाती है और उन्हें सधी हुई पत्रकारिता और ईमानदार रुख के लिए जाना जाता है।
रिया चक्रवर्ती से माफी मांगने वाली इकलौती पत्रकार
पत्रकारिता की नैतिकता पर लिखने वाले रतन आचार्य ने सोशल मीडिया पर प्रीति चौधरी के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि वह इकलौती भारतीय पत्रकार हैं, जिसने रिया चक्रवर्ती से माफी मांगने की हिम्मत दिखाई।
रिया चक्रवर्ती केस में कई घंटों की डिबेट और एकतरफा कवरेज चली थी, जिसे बाद में ‘टीवी इतिहास का काला अध्याय’ करार दिया गया। ऐसे माहौल में जब लगभग सभी चैनल आरोपी की भूमिका में थे, प्रीति चौधरी का यह कदम एक पेशेवर विवेक की मिसाल बन गया।
TRP-ड्रिवन एंकरों के बीच नैतिकता का सवाल
प्रीति चौधरी की ईमानदार पत्रकारिता की मिसाल देने वाले कई लोग एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठाते हैं।
कई मीडिया विशेषज्ञ यह सवाल करते हैं कि प्रीति चौधरी जैसी सत्य और संतुलन के प्रति इतनी ईमानदार पत्रकार, श्वेता सिंह और अंजना ओम कश्यप जैसी उन TRP-ड्रिवन एंकरों के साथ कैसे काम करती होंगी, जिनकी रिपोर्टिंग अक्सर सनसनी और आरोपों पर केंद्रित रहती है।
यह सवाल आज भी भारतीय मीडिया इंडस्ट्री के भीतर के द्वंद्व को दर्शाता है: क्या पत्रकारिता की सच्चाई को टीआरपी और प्रतिस्पर्धा के दबाव के बीच बचाया जा सकता है?
प्रीति चौधरी का स्टैंड साबित करता है कि व्यावसायिक दबाव के बावजूद, पत्रकारिता की मूल अस्मिता को बचाए रखना संभव है। उनका यह साहसी कदम आज भी उन सभी पत्रकारों के लिए एक प्रेरणा है, जो निष्पक्षता और नैतिकता के साथ समझौता नहीं करना चाहते।
प्रीति चौधरी के इस साहसिक कदम पर आपकी क्या राय है? क्या मीडिया को अपनी गलतियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें।