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पत्रकार राजीव प्रताप, उत्तरकाशी, सड़क हादसा

उत्तराखंड के युट्यूबर पत्रकार राजीव प्रताप सिंह की रहस्यमय मौत की गुत्थी को सुलझाने का दावा उत्तराखंड पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने किया है। ‘दिल्ली उत्तराखंड लाइव’ नामक यूट्यूब चैनल चलाने वाले राजीव प्रताप (36) का शव भागीरथी नदी से बरामद हुआ था। जहाँ परिवार ने उनकी लोकल रिपोर्टिंग के कारण धमकियाँ मिलने और सुनियोजित साज़िश का आरोप लगाया था, वहीं SIT का निष्कर्ष इस मामले को “सड़क हादसा” करार देता है।

SIT जाँच का निष्कर्ष: नशे में ड्राइविंग और सड़क हादसा

देहरादून से आई खबरों के अनुसार, SIT ने अपनी जाँच में दावा किया है कि राजीव प्रताप की मौत सड़क हादसे के कारण हुई। रिपोर्ट में कथित रूप से यह सामने आया है कि 18 सितंबर की रात राजीव प्रताप शराब के नशे में कार चला रहे थे, जिसके कारण उनकी कार फिसलकर भागीरथी नदी में गिर गई।

पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी सड़क हादसे से जुड़ी चोटों की पुष्टि हुई है।

जाँच टीम ने यह भी दावा किया कि:

  • 18 सितंबर की शाम लगभग 7 बजे, राजीव प्रताप ने अपने कैमरामैन मनवीर कलुडा और पुलिस लाइंस उत्तरकाशी के हेड कांस्टेबल सोबन सिंह के साथ शहीद स्मारक के पास मुलाकात की।
  • वे बाद में एक टैक्सी स्टैंड पर गए और वहाँ शराब पीना शुरू किया।
  • रात करीब 10 बजे, कलुडा घर चले गए।
  • राजीव प्रताप और सोबन सिंह बाज़ार गए और बस स्टैंड के पास एक होटल में प्रवेश किया।
  • रात 11 बजे, राजीव प्रताप होटल से बाहर निकले, जो नशे की हालत में दिख रहे थे। सोबन सिंह भी उनके पीछे निकले।
  • CCTV फुटेज में 11:22 बजे सोबन सिंह को कार में बैठे राजीव प्रताप से बात करते हुए देखा गया।
  • 11:23 बजे, राजीव प्रताप कार लेकर गंगोरी की ओर निकल गए। कार को अंतिम बार रात 11:38 बजे गंगोरी पुल पर CCTV में देखा गया था, जिसके बाद वह लापता हो गई।

परिवार का संदेह और लापता होने की रहस्यमय रात

राजीव प्रताप, जो भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के पूर्व छात्र थे, 19 सितंबर को उत्तरकाशी में लापता हो गए थे। परिवार ने उनके लापता होने को उनकी निर्भीक पत्रकारिता से जोड़ा था। उन्होंने हाल ही में उत्तरकाशी जिला अस्पताल की ख़राब स्थिति और अन्य स्थानीय गड़बड़ियों पर रिपोर्टिंग की थी, जिसके कारण उन्हें धमकियाँ मिल रही थीं।

राजीव प्रताप के चाचा कृपाल सिंह ने अपनी शिकायत में यह संदेह जताया था कि राजीव अपने मित्र सोबन सिंह की ऑल्टो कार लेकर गंगौरी-भटवाड़ी की ओर रवाना हुए थे, जबकि उस रात उनके पास उस दिशा में जाने का कोई स्पष्ट कारण नहीं था। इस रहस्यमय परिस्थितियों के कारण परिवार ने हमेशा अपहरण और साज़िश का संदेह जताया।

SDRF कमांडेंट अर्पन यादववंशी ने पुष्टि की कि 19 सितंबर को भागीरथी नदी में वाहन डूबने की सूचना मिली थी, जिसके बाद कई दिनों की खोज के बाद रविवार को जोशियारा बैराज से शव बरामद किया गया।

सवाल अब भी बरकरार है: SIT ने भले ही निष्कर्ष दे दिया हो, लेकिन कई सवाल अब भी खड़े हैं: क्या नशे में धुत होने की बात सच है? क्या राजीव प्रताप को जानबूझकर उस रास्ते पर अकेला छोड़ा गया? और उनकी धमकियों के मामले में क्या कार्रवाई की गई थी?

जैसा कि कई लोग मानते हैं, छोटे शहरों में सिस्टम से लड़ने वाले पत्रकार सचमुच के हीरो होते हैं। राजीव प्रताप की आवाज़ भले ही खामोश हो गई हो, लेकिन उनकी मौत का सच और उनके उठाए गए सवाल तब तक जिंदा रहेंगे, जब तक परिवार को संतुष्ट करने वाला इंसाफ नहीं मिल जाता।

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