दक्षिण कोरिया में 45 साल बाद मार्शल लॉ लगाने की वजह क्या है?

साउथ कोरिया के राष्ट्रपति यून युक योल ने अपने देशवासियों से माफी मांगी है। उन्होंने यह भी कहा कि वह राष्ट्रपति रहेंगे या नहीं, उनका राजनीतिक भविष्य क्या होगा, यह उनकी पार्टी तय करेगी। बीते मंगलवार, 3 दिसंबर 2024 को, कोरियन समयानुसार रात करीब 11:00 बजे, यून ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि देश को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये सभी देश को बांटने की मंशा रखते हैं। विपक्षी सांसदों के साथ दुश्मन देश उत्तर कोरिया से सांठ-गांठ का हवाला देते हुए उन्होंने मार्शल लॉ लगाने की घोषणा की। हालांकि, भारी प्रदर्शन और संसद में हुई वोटिंग के बाद महज 6 घंटे के भीतर ही मार्शल लॉ को वापस ले लिया गया।

इस घटना के बाद दक्षिण कोरिया की अंतरराष्ट्रीय तौर पर निंदा हो रही है। अमेरिका, जापान सहित कई कोरियाई मित्र देशों ने इस घटना को लेकर चिंता व्यक्त की है। भारी विरोध प्रदर्शन के बाद कोरियाई रक्षा मंत्री योंग ह्युन ने मार्शल लॉ लगाए जाने की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। साथ ही, 12 अन्य मंत्रियों ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राष्ट्रपति यून की अपनी रूढ़िवादी पीपल्स पावर पार्टी ने भी मार्शल लॉ लगाए जाने को लेकर विरोध जताया है। कोरिया में आज के समय में संसद से लेकर सड़कों तक “यून सुक इस्तीफा दो” के नारे लगते हुए देखे जा सकते हैं। विपक्षी उदारवादी डेमोक्रेटिक पार्टी ने यून के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया है। लेख लिखते समय तक यह प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है; अब तक वोटिंग जारी है।

नेशनल असेंबली की 300 सीटों में से 108 सीटें रूढ़िवादी पीपल्स पावर पार्टी के पास हैं, जबकि 170 सीटों पर मुख्य विपक्षी उदारवादी डेमोक्रेटिक पार्टी का कब्जा है। बाकी 12 सीटें अन्य छोटे दलों के पास हैं। महाभियोग प्रस्ताव को पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 300 में से कुल 200 सदस्यों का समर्थन चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो राष्ट्रपति यून की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है।

मार्शल लॉ लगने के बाद का घटनाक्रम:-

3 दिसंबर 2024 को रात करीब 11:00 बजे राष्ट्रपति यून युक योल ने मार्शल लॉ लगाने की घोषणा की। इसके तुरंत बाद सेना के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि करते हुए राजनीतिक गतिविधियों पर रोक और मीडिया को सेंसर करने की बात कही। बख्तरबंद गाड़ियाँ और भारी सैन्य काफिला कुछ ही घंटों में सड़कों पर दौड़ने लगीं। एक दृश्य, जिसने सबका ध्यान खींचा, वह था जब बख्तरबंद गाड़ियों और सैन्य जवानों ने कोरियाई सांसदों को चारों ओर से घेर लिया। सैन्य बलों ने संसद में प्रवेश करने वाले सांसदों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। दरअसल, यून के मार्शल लॉ के ऐलान के बाद कोरियाई विपक्षी पार्टी उदारवादी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ली जे-म्यांग ने सभी विपक्षी सांसदों से मार्शल लॉ के खिलाफ वोटिंग करने की अपील की और आम जनता से सैन्य ताकतों से देश को बचाने के लिए एसेंबली के बाहर जमा होने का आह्वान किया।

इसके तुरंत बाद संसद से लेकर सड़कों तक भारी प्रदर्शन देखने को मिले। बुधवार तड़के करीब 1:00 बजे, सैन्य जवानों को चकमा देकर विपक्षी सांसद नेशनल असेंबली पहुँचने में कामयाब हो गए। मार्शल लॉ हटाने को लेकर हुई वोटिंग में 300 में से 190 सांसदों ने प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया। इसके तुरंत बाद पूरे देश से मार्शल लॉ का आदेश वापस ले लिया गया।

मार्शल लॉ लगाने की संभावित वजह

अप्रैल में हुए आम चुनाव में राष्ट्रपति यून सुक योल की पीपल्स पावर पार्टी बुरी तरह हार गई, लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के कारण वह सत्ता में नहीं आ पाई। इसके बाद संसद में कई प्रस्तावों को लेकर विपक्ष और सत्ता के बीच खींचतान चल रही थी। कुछ दिन पहले विपक्ष ने बजट में कटौती को लेकर संसद में प्रस्ताव पेश किया था। देश के कानून के मुताबिक राष्ट्रपति इस विषय पर अपना वीटो नहीं इस्तेमाल कर सकते। इसके साथ ही यून की पत्नी पर स्टॉक एक्सचेंज में धोखाधड़ी और महँगे डिजाइनर बैग उपहार में लेने के भी आरोप लगे थे। इस पर भी जांच बैठाई गई थी। पिछले महीने उन्होंने माफी भी मांगी थी, जब उन्होंने अपनी पत्नी के कामकाज को देखने के लिए अलग ऑफिस देने की बात कही थी। हाल में उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के रिश्ते अच्छे नहीं दिख रहे हैं। कुछ दिन पहले ही किंग-जांग के आदेश के बाद दक्षिण कोरिया से उत्तर कोरिया जाने वाली सड़कों और रेल मार्ग को उड़ा दिया गया और अपने जवानों को युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा गया। फॉरेन एक्सपर्ट्स के मुताबिक यून अपनी जनता के सामने उत्तर कोरिया और देशप्रेम की भावना दिखाकर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में लगे हैं।

मार्शल लॉ और इसके इतिहास?

दक्षिण कोरिया के संविधान का अनुच्छेद 77 राष्ट्रपति को गंभीर राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान मार्शल लॉ लागू करने का अधिकार देता है। मार्शल लॉ लगने के बाद राजनीतिक गतिविधियों पर रोक, नागरिकों के अधिकारों का समाप्त होना, मीडिया का सेंसर होना, प्रदर्शन पर प्रतिबंध और बिना वारंट गिरफ्तारी जैसे अधिकार सेना को मिल जाते हैं। दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ की घोषणा आखिरी बार 1989 में हुई थी, जब तत्कालीन सैन्य तानाशाह पार्क युंग-ही की तख्तापलट के दौरान मौत हो गई थी। साल 1987 में दक्षिण कोरिया के संसदीय लोकतंत्र बनने के बाद इसे कभी लागू नहीं किया गया। इतने सालों बाद इस कानून के लागू होने से लोगों में तानाशाही की यादें ताजा हो गई हैं।

Leave a comment