हेमा कमेटी की रिपोर्ट ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री को बेनकाब किया?

कोलकाता रेप केस को लेकर जहां एक तरफ डॉक्टरों का धरना-प्रदर्शन जारी है, वहीं अब हेमा कमेटी की रिपोर्ट ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के साथ हो रहे यौन शोषण को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

रिपोर्ट सामने आते ही कई मशहूर अभिनेता और निर्देशक ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के बड़े पदों से इस्तीफा दे दिया है। भारत में 2017-18 के बाद फिर से #MeToo 2.0 अभियान की शुरुआत हो गई है। कई मलयाली अभिनेत्रियों ने सोशल मीडिया के जरिए अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की घटनाओं को साझा किया है। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद केरल सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच समिति का गठन कर दिया है, लेकिन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर 5 साल तक रिपोर्ट जारी न करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

क्या है हेमा कमेटी रिपोर्ट?

फरवरी 2017 में, मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री भावना मेनन को उस समय किडनैप कर लिया गया था, जब वह अपनी गाड़ी से कोच्चि जा रही थीं। कुछ लोगों ने उन्हें गाड़ी में किडनैप कर सामूहिक दुष्कर्म किया और उनका वीडियो भी बनाया। जांच में पाया गया कि घटना में मलयाली अभिनेता दिलीप का हाथ था। इस मामले में अभी भी केस चल रहे हैं, और अब तक तीन गवाह अपने बयान बदल चुके हैं।

इस घटना के बाद, 2017 में केरल सरकार ने रिटायर्ड जज के. हेमा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया। समिति में जस्टिस के. हेमा के साथ रिटायर्ड आईएएस अधिकारी के.बी. वलसाला और अभिनेत्री शारदा शामिल थीं। समिति ने जांच पूरी कर दिसंबर 2019 में केरल सरकार को 295 पेज की रिपोर्ट सौंप दी थी।

रिपोर्ट में किन-किन बातों का जिक्र किया गया है?

रिपोर्ट में मुख्य रूप से कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, लैंगिक असमानता, और महिला कलाकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बात की गई है। समिति के सामने 80 महिला कलाकारों ने अपने बयान दर्ज करवाए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कई लड़कियां, जिनकी उम्र 18 साल से कम है, उन्होंने भी कमेटी के सामने यौन शोषण की बात कही है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि मलयालम फिल्म इंडस्ट्री पर कुछ चुनिंदा अभिनेता और निर्देशक का नियंत्रण है। महिला कलाकारों को काम देने के बदले यौन फेवर मांगना, स्क्रिप्ट में इंटिमेसी सीन न होने के बावजूद जबरदस्ती ऐसे सीन करवाना, गाली-गलौज करना, देर रात शराब के नशे में घर का दरवाजा खटखटाना, और उनके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करना शामिल है। यौन फेवर देने से इनकार करने पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जाता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जूनियर महिला कलाकारों के लिए शौचालय, पीने का पानी, और चेंजिंग रूम जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं होती हैं।

रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में देरी क्यों?

हेमा कमेटी ने दिसंबर 2019 में केरल सरकार को रिपोर्ट सौंप दी थी, लेकिन इसे 5 साल तक सार्वजनिक नहीं किया गया। कई पत्रकारों और मीडिया कर्मियों द्वारा दायर किए गए आरटीआई के बाद, 9 अगस्त 2024 को केरल सरकार ने रिपोर्ट को सार्वजनिक किया। आरटीआई कानून 2005 के तहत केरल सूचना आयोग ने 6 जुलाई 2024 को रिपोर्ट जारी करने का आदेश दिया था। साथ ही, गवाही देने वाली महिला कलाकारों की प्राइवेसी का ध्यान रखने की बात भी कही गई।

295 पेज की रिपोर्ट में से 60 पेज हटा दिए गए थे, और केवल 235 पेज ही सार्वजनिक किए गए। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि समिति की अध्यक्ष के. हेमा ने खुद रिपोर्ट जारी न करने की सलाह सरकार को दी थी।

रिपोर्ट जारी होने के बाद का घटनाक्रम

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। हालांकि, केरल हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि रिपोर्ट के आधार पर अब तक कितनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट पर कार्रवाई किए बिना ही जांच दल गठित कैसे कर दिया गया?

हेमा कमेटी की रिपोर्ट जारी होने के बाद, एक मलयालम अभिनेत्री ने दिग्गज अभिनेता सिद्दीकी पर आरोप लगाया कि सिद्दीकी ने 19 साल की उम्र में उनका यौन शोषण किया था, और यह बात उन्होंने 2019 में सार्वजनिक रूप से बताई थी, लेकिन किसी ने उन पर विश्वास नहीं किया। आरोप के बाद सिद्दीकी ने एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया।

इसी बीच, बंगाली अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा ने मलयालम निर्देशक रंजीत पर उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसके बाद रंजीत ने केरल चलचित्र अकादमी के पद से इस्तीफा दे दिया। साथ ही, मीनू मुनीर ने अपने फेसबुक पोस्ट में मुकेश, मनियानपिला राजू, इदावेला बाबू, और जयसूर्या पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है।

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