रद्द हो चुकी शारब नीति से जूडे भ्रष्टाचार के मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल CBI गिरफ़्तारी वैध थी या अवैध , इसका फैसला दिल्ली हाई कोर्ट 29 जुलाई को करेगी | कोर्ट इसमे पहला और आखिरी जमानत की उसकी अर्जी पर फैसला सुना सकती है.
अगर केजरीवाल को जमानत मिली तो वह जांच को प्रभावित कर सकते हैं। सीबीआई के दस्तावेज की कोई कॉपी नहीं दी गई। कस्टडी के दौरान पूछताछ की जानकारी दी गई थी, लेकिन कोई नोटिस नहीं दिया गया। यह एक अतिरिक्त गिरफ्तारी है। एक इंश्योरेंस अरेस्ट की तरह। ये चाहते हैं कि केजरीवाल जेल के बाहर न आएं, इसलिए दूसरे केस में गिरफ्तार किया।
सीबीआई के वकील ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह कौन तय करेगा कि जांच कैसे की जाती है। केजरीवाल या उनके वकील तय नहीं करेंगे। सीबीआई को यह तय करने का अधिकार है कि किस आरोपी को कब गिरफ्तार किया जाए। केस में शुरुआत में उनकी भूमिका स्पष्ट नहीं थी, क्योंकि यह सब आबकारी मंत्री के अधीन हुआ था। कुछ चीजें हमारे सामने आईं, लेकिन हमने उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया था। क्योंकि वे सीएम हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को 10 मई को सिर्फ चुनाव प्रचार के लिए जमानत दी थी। वे ईडी मामले में जमानत पर बाहर आए थे। हम उन्हें उसी दिन गिरफ्तार कर सकते थे। एक जिम्मेदार एजेंसी होने के नाते हमने इंतजार करना ज्यादा सही समझा। सवाल यह है कि कौन जांच को प्रभावित कर सकता है यह वही आदमी है।
केजरीवाल के निर्देश पर ही थोक शराब विक्रेताओं का कमीशन दो से बढ़ाकर 12 फीसदी किया गया। गोवा चुनावों के लिए 45 करोड़ रुपये के किकबैक का ट्रेल भी स्पष्ट है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट है कि शराब घोटाले के मुख्य आरोपी विजय नायर को खुद केजरीवाल के निर्देश पर मुख्यमंत्री सरकारी बंगले में रहने की अनुमति दी गई थी।