
रूस में इस साल यह दूसरा सबसे बड़ा आतंकी हमला है। रूस की राजधानी मॉस्को से 125 किलोमीटर दूर दक्षिणी दागिस्तान में हुए आतंकी हमले में 20 लोगों के मारे जाने की खबर है। हमलावरों ने डर्बेंट शहर में एक पुलिस चौकी, यहूदियों के उपासना घर, और दो गिरजाघरों को निशाना बनाया है। मरने वालों में 15 पुलिसकर्मी, एक पादरी, और 4 आम लोग शामिल हैं। आधिकारिक बयानों के अनुसार, पांचों आतंकियों को मार दिया गया है, जबकि उनके साथियों की तलाश जारी है। आतंकियों ने गिरजाघर और उपासनागृह में आग भी लगा दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, यह क्षेत्र चरमपंथियों का गढ़ रहा है।
रूस में क्यों बढ़ रही हैं आतंकी घटनाएं?
रूस पिछले दो साल से यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध में व्यस्त है। युद्ध के कारण हो रहे नुकसान के साथ-साथ रूस को आतंकी हमलों से भी भारी आर्थिक क्षति हो रही है। मॉस्को में इस साल 23 मार्च, 2024 को एक कॉन्सर्ट हॉल में बड़ा आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 150 लोगों की मौत हो गई थी। सरकारी मीडिया ‘तास’ के अनुसार, ये आतंकी यूक्रेन से सटे सीमा क्षेत्र से रूस में आए थे और सेना की वर्दी पहनकर मॉस्को में प्रवेश किया था। साथ ही यह भी दावा किया गया था कि इस आतंकी हमले के लिए यूक्रेन भी जिम्मेदार है।
आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले की जिम्मेदारी अब तक किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तीन महीने पहले जिस आतंकी संगठन ISIS (K) ने मॉस्को में हमला कर 150 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था, उसी ने इस बार भी हमले को अंजाम दिया है।
ISIS (K) का नाम खुरासान के नाम पर रखा गया है, जो उत्तरी अफगानिस्तान, दक्षिणी तुर्कमेनिस्तान, और उत्तर-पूर्वी ईरान के क्षेत्रों में आता है। यह आतंकी संगठन 2014 में पूर्वी अफगानिस्तान में स्थापित हुआ था और इसमें रूस के उग्रवादी समूहों के अलावा अन्य कई उग्रवादी संगठन शामिल हैं।
बीबीसी के अनुसार, इस्लामिक आतंकी संगठन ISIS (K) खुरासान रूस को इसलिए निशाना बनाता है क्योंकि पुतिन की सरकार चेचन्या और सीरिया में हमले कर मुसलमानों पर अत्याचार करती है। ऐसा ही संघर्ष सोवियत संघ के समय में भी देखने को मिला था, जब अफगानिस्तान में रूस और इस्लामिक उग्रवादी गुट एक-दूसरे से भिड़ते रहते थे। रूस में हुए आतंकी हमले को लेकर भारत समेत दुनिया के कई देशों ने शोक व्यक्त किया है।