बीजेपी के 400 पार का दावा हुआ चकनाचूर यह नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत हार…..

2024 में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों ने सबको चौंका दिया। टीवी पत्रकार, मीडिया विशेषज्ञ और चुनावी समीकरण बताने वाले सेफोलॉजिस्ट भी इस बार विफल हो गए। जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भाजपा को 310 सीटें जीतने का दावा किया था, लेकिन जनता ने अपना फैसला सुनाते हुए भाजपा को 240 सीटों पर सीमित कर दिया। वहीं, एनडीए 14 गठबंधन दलों के समर्थन से 293 सीटों के साथ सरकार बनाने में कामयाब रही। जवाहरलाल नेहरू के बाद नरेंद्र मोदी ऐसे दूसरे प्रधानमंत्री बने, जिन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है।

बीजेपी 250 के आंकड़े के नीचे क्यों सिमटी?

बीजेपी के अति आत्मविश्वास, चुनाव में संघ का समर्थन न लेना, या विपक्ष के आरक्षण मुद्दे का हावी होना इत्यादि कारण हो सकते हैं। संघ, जो लगभग 100 साल पुरानी संस्था है, 90 के दशक से भाजपा को राजनीतिक समर्थन देता आ रहा है और भाजपा के दो सीटों से 303 सीटों तक के सफर में इसका बड़ा योगदान रहा है। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संघ से मदद नहीं लेने का ऐलान किया था। भाजपा ने “मोदी सरकार तीसरी बार, अबकी बार 400 पार” का नारा दिया, जिसे कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि भाजपा ईवीएम हैक करके 400 सीटें जीतने और संविधान बदलकर आरक्षण खत्म करने का प्रयास करेगी, जिससे भाजपा के खिलाफ माहौल बन गया।

चुनावी मुद्दे और रणनीति

बीजेपी ने अपनी पुरानी रणनीति को जारी रखते हुए राम मंदिर, परिवारवाद, और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर चुनावी अभियान केंद्रित किया। भले ही बीजेपी चुनावी सभाओं में भीड़ जुटाने में सफल दिखी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और थी। कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश को जीतने वाला ही दिल्ली की गद्दी पर बैठता है, लेकिन इस बार वहां भाजपा को सिर्फ 33 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को 6 और सपा को 37 सीटें मिलकर वह सबसे बड़ी पार्टी बन गई। भाजपा ने उत्तर प्रदेश में टिकट बंटवारे के दौरान जातीय समीकरण को उतना महत्व नहीं दिया जितना इंडिया गठबंधन ने दिया।

बीजेपी को सहयोगियों की कितनी जरूरत?

इंडिया गठबंधन के सूत्रधार नीतीश कुमार अब मोदी सरकार को सत्ता में बनाए रखने में किंगमेकर की भूमिका निभा रहे हैं। बीजेपी को 240 सीटें मिलीं, जबकि सरकार बनाने के लिए 272 सीटों का जादुई आंकड़ा चाहिए। इसलिए बीजेपी को अपने सहयोगियों की बहुत जरूरत है। सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी, तेलुगु देशम पार्टी को लोकसभा में 16 सीटें मिलीं और उसने आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी 135 सीटें जीतकर सरकार बनाई। एनडीए की दूसरी बड़ी सहयोगी पार्टी जदयू को 12 सीटें मिलीं। एनडीए ने कुल 293 सीटों पर जीत दर्ज की।

इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन

इंडिया गठबंधन ने 236 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया। इनमें से सबसे ज्यादा 99 सीटें कांग्रेस को मिलीं, सपा को 37, तृणमूल कांग्रेस को 29, और बाकी 18 पार्टियों ने 71 सीटें जीतीं। भाजपा पूर्ण बहुमत से 32 सीटें दूर रह गई, जबकि इंडिया गठबंधन को केवल 36 और सीटें चाहिए थीं ताकि वह सरकार बना सके। यह परिणाम इसलिए भी चौंकाने वाला था क्योंकि बीजेपी ने राम मंदिर, घर-घर राशन, और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को लेकर जोरदार प्रचार किया था, जिससे वह अति आत्मविश्वासी हो गई थी।

मीडिया कैंपेनिंग पर खर्च के बावजूद नुकसान

बीजेपी ने 2014 से 2022 तक 8,500 करोड़ रुपये मीडिया विज्ञापनों पर खर्च किए, जिसमें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, और सोशल मीडिया शामिल था। 2024 लोकसभा चुनाव में गूगल पर 41 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि कांग्रेस ने 30 करोड़ रुपये खर्च किए। हालांकि, सोशल मीडिया पर विपक्ष ने बीजेपी को संविधान और आरक्षण बचाओ जैसे मुद्दों पर घेरते हुए अधिक प्रभावी साबित हुआ।

एनडीए सरकार के भविष्य पर सवाल

एनडीए सरकार 5 साल तक चलेगी या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है, क्योंकि नीतीश कुमार ने 2014 के बाद से 6 बार गठबंधन बदला है। वहीं, चंद्रबाबू नायडू भी सही समय की तलाश में हैं। बीजेपी को सहयोगी दलों को विश्वास में लेकर बड़े फैसले लेने होंगे, क्योंकि कई दलों की विचारधारा भिन्न है।

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